CAG के चयन के लिए कॉलेजियम बनाने का केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट में किया विरोध, कहा- ‘इसके लिए संविधान संशोधन करना होगा’
महालेखा परीक्षक यानी CAG की चयन प्रक्रिया में बदलाव की मांग पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार ने समय मांगा है. सुप्रीम कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए सुनवाई टाल दी है. याचिका में मांग की गई है कि CAG का चयन प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को मिल कर करना चाहिए.
‘संविधान संशोधन की जरूरत होगी’
सुप्रीम कोर्ट ने 17 मार्च को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया था. शुक्रवार,1 अगस्त को हुई सुनवाई में केंद्र ने कोर्ट का ध्यान इस ओर दिलाया CAG के चयन की व्यवस्था संविधान में दी गई है. सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस प्रक्रिया में किसी भी बदलाव के लिए संविधान संशोधन की जरूरत होगी. जस्टिस सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने उनसे लिखित जवाब दाखिल करने को कहा.
2 याचिकाएं लंबित हैं
सुप्रीम कोर्ट में CAG चयन पर 2 याचिकाएं लंबित हैं. एक एनजीओ सेंटर फॉर पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन (CPIL) की है और दूसरी पूर्व डिप्टी CAG अनुपम कुलश्रेष्ठ की. दोनों में कहा गया है कि अभी CAG की नियुक्ति प्रधानमंत्री की सिफारिश पर राष्ट्रपति करते हैं. इस पद की अहमियत को देखते हुए इसके लिए योग्य और निष्पक्ष व्यक्ति का चयन जरूरी है.
चयन के लिए कमेटी बनाने की मांग
CPIL ने CAG के चयन के लिए प्रधानमंत्री, लोकसभा में नेता विपक्ष और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की कमेटी बनाने की मांग की है. वहीं, अनुपम कुलश्रेष्ठ की याचिका में प्रधानमंत्री, लोकसभा स्पीकर, नेता विपक्ष, संसद की लोक लेखा समिति के अध्यक्ष और चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया के कॉलेजियम के जरिए CAG के चयन की मांग की गई है.
पिछली सुनवाई में क्या हुआ था?
मार्च में हुई सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि संविधान के अनुच्छेद 148 में CAG की नियुक्ति को लेकर जो लिखा है, कोर्ट उसमें बदलाव नहीं कर सकता. संविधान सभा ने CAG की निष्पक्षता और स्वतंत्रता को लेकर काफी बहस हुई थी. CAG के पद को किसी प्रभाव से मुक्त रखने के लिए संविधान में यह व्यवस्था बनाई गई कि इस पद पर बैठे व्यक्ति को सुप्रीम कोर्ट जज जैसी प्रक्रिया के जरिए ही हटाया जा सकता है. अब उनकी चयन प्रक्रिया में बदलाव की मांग संविधान को दोबारा लिखने जैसी बात होगी.
इसका जवाब देते हुए याचिकाकर्ता के लिए पेश वकील प्रशांत भूषण ने कहा कि पिछले कुछ समय में CAG की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठने लगे हैं. CAG के चयन के लिए निष्पक्ष कमेटी बनाने की मांग को संविधान को नए सिरे से लिखना नहीं कहा जा सकता. कमेटी बनाकर चयन संविधान निर्माताओं की उस भावना के अनुरूप होगा जिसमें उन्होंने निष्पक्ष CAG की कल्पना की थी. भूषण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट CBI निदेशक और चुनाव आयुक्तों के चयन के लिए भी कमेटी बनाने का आदेश दे चुका है. इस मामले में भी ऐसा किया जाना चाहिए. आखिरकार जज इस याचिका पर नोटिस जारी करने पर सहमत हो गए थे.
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