2006 मुंबई ट्रेन ब्लास्ट केस में हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, लेकिन फिलहाल जेल से बाहर ही रहेंगे 11 आरोपी

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मुंबई के 2006 ट्रेन ब्लास्ट मामले में हाई कोर्ट के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी है. हालांकि, आदेश में यह साफ किया गया है कि हाई कोर्ट के फैसले के बाद रिहा हो चुके आरोपियों को फिलहाल दोबारा जेल नहीं भेजा जाएगा. कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की तरफ से दाखिल अपील पर सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है.

11 जुलाई, 2006 को मुंबई की कई लोकल ट्रेनों में 7 बम धमाके हुए थे. शाम 6:23 से 6:29 के बीच हुए इन धमाकों में 187 लोग मारे गए थे और 824 घायल हुए थे. 2015 में विशेष मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट) कोर्ट ने मामले में 12 लोगों को दोषी करार दिया. इनमें से 5 को मृत्युदंड और 7 को आजीवन कारावास दिया गया.

जिन 5 लोगों को निचली अदालत ने फांसी की सजा दी थी, उनके नाम हैं- कमाल अंसारी, मोहम्मद फैसल अताउर रहमान शेख, एहतेशाम सिद्दीकी, नवीद हुसैन खान और आसिफ खान. इन सबको कोर्ट ने ट्रेन में बम रखने का दोषी माना था. साजिश में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए जिन 7 लोगों को ताउम्र जेल की सजा मिली थी, वह हैं- तनवीर अहमद अंसारी, माजिद मोहम्मद शफी, शेख मोहम्मद अली आलम, मोहम्मद साजिद अंसारी, मुजम्मिल अताउर रहमान शेख, सुहेल महमूद शेख और जमीर अहमद लतिफुर रहमान शेख.

सभी दोषियों ने निचली अदालत के फैसले के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. अपील लंबित रहते कमाल अंसारी की साल 2021 में नागपुर जेल में कोविड-19 से मौत हो गई थी. इस साल 21 जुलाई को हाई कोर्ट के जस्टिस अनिल किलोर और जस्टिस श्याम चांडक की बेंच ने फैसला दिया. इस फैसले में सभी लोगों को बरी कर दिया गया.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में पुलिस की तरफ से की गई जांच पर गंभीर सवाल उठाए. जजों ने कहा कि अभियोजन पक्ष यह बताने में भी असफल रहा कि अपराध में किस तरह के बमों का इस्तेमाल हुआ. जिन सबूतों को उसने रखा है, वह आरोपियों को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.

महाराष्ट्र सरकार ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ तुरंत याचिका दाखिल की. गुरुवार, 24 जुलाई को मामला जस्टिस एम एम सुंदरेश और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच में लगा. राज्य सरकार के लिए पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने फैसले पर रोक की मांग की. उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में बहुत सी ऐसी बातें कही गई हैं जो दूसरे मुकदमों पर असर डालेंगी. मेहता ने साफ किया कि वह हाई कोर्ट के फैसले के बाद रिहा हो चुके आरोपियों को दोबारा जेल भेजने की मांग नहीं कर रहे हैं.

जस्टिस सुंदरेश ने कहा कि उन्होंने केस का रिकॉर्ड देखा है. कुछ आरोपी पाकिस्तानी नागरिक हैं. अगर वह देश से चले गए तो क्या होगा? मेहता ने जवाब दिया कि जो लोग रिहा हुए हैं, वह भारतीय हैं. पाकिस्तानी आरोपी गिरफ्तार नहीं हो पाए थे. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले पर नोटिस जारी करते हुए रोक लगा दी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जेल से बाहर आ चुके आरोपियों को दोबारा अंदर न भेजा जाए

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