‘लोगों ने कहा.. और मारना था’, पाकिस्तान पर ऑपरेशन सिंदूर को लेकर बोले IAF चीफ
पाकिस्तान पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की कार्रवाई को लेकर शनिवार (09 अगस्त, 2025) को भारतीय वायु सेना (आईएएफ) प्रमुख अमरप्रीत सिंह ने कहा कि आतंकी शिविरों पर भारत के सटीक हमले के बाद उनके करीबी लोगों ने कहा, ‘और मारना था’, यानि कहने का मतलब है कि भारत को पाकिस्तान पर और हमले करने चाहिए थे.
उन्होंने कहा, ‘हमारा उद्देश्य बिल्कुल स्पष्ट था. हमारा उद्देश्य आतंकवादियों को ऐसा सबक सिखाना था कि वे कुछ भी करने से पहले दो बार सोचेंगे; अब उन्हें पता है कि उन्हें इसकी कितनी कीमत चुकानी पड़ सकती है और एक बार जब हम ये उद्देश्य हासिल कर लें तो हमें इसे जारी रखने के बजाय, इसे रोकने के सभी अवसर तलाशने चाहिए.
पाकिस्तान को हुए नुकसान पर पहली आधिकारिक टिप्पणी
एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह ने कहा कि भारतीय वायुसेना ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान पाकिस्तान के पांच लड़ाकू विमानों और एक बड़े विमान को मार गिराने की पुष्टि की है. उन्होंने इसे भारत की ओर से सतह से हवा में मार गिराने का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड बताया.
तीन महीने पहले किए गए भारतीय हवाई हमलों के दौरान पाकिस्तान को हुए नुकसान पर यह पहली आधिकारिक टिप्पणी है. कई विपक्षी नेता ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान भारत और पाकिस्तान दोनों को हुए नुकसान का खुलासा करने में देरी को लेकर सरकार पर हमला कर रहे हैं. यह अभियान अप्रैल में पहलगाम में आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद 7 मई से चलाया गया था.
5 विमान मार गिराने की सही जानकारी
सिंह ने यहां एयर चीफ मार्शल एल.एम. कात्रे स्मृति व्याख्यान के 16वें संस्करण के दौरान सीमा के निकट और पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी मुख्यालयों और अन्य आतंकी ठिकानों पर 7 मई को किए गए हमलों का विस्तृत ब्यौरा भी प्रस्तुत किया.
उन्होंने कहा, ‘हमारे पास कम से कम पांच लड़ाकू विमानों को मार गिराए जाने की सही जानकारी है और एक बड़ा विमान है, जो या तो विमान हो सकता है या फिर एडब्ल्यूसी (एयरबोर्न वॉर्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम), जिसे लगभग 300 किलोमीटर की दूरी से निशाना बनाया गया. यह वास्तव में सतह से हवा में मार गिराने का अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड है, जो हमने हासिल किया है.’
भारतीय प्रतिष्ठानों को कोई नुकसान नहीं
सिंह ने कहा, ‘उस एडब्ल्यूसी हैंगर में कम से कम एक एडब्ल्यूसी के होने के संकेत मिले हैं और कुछ एफ-16 को भी नुकसान पहुंचा, जो वहां रखरखाव के लिए थे’. सिंह ने कहा कि इस ऑपरेशन के परिणामस्वरूप बड़ी संख्या में मानवरहित हवाई वाहन (यूएवी), ड्रोन और उनकी कुछ मिसाइलें भी भारतीय क्षेत्र में गिरीं, लेकिन इनसे भारतीय प्रतिष्ठानों को कोई नुकसान नहीं हुआ.
‘ऑपरेशन’ की सफलता के पीछे एक प्रमुख कारण ‘राजनीतिक इच्छाशक्ति’ को बताते हुए सिंह ने कहा, ‘मैं यहां बहुत-बहुत स्पष्ट, बहुत खुलापन दिखा रहा हूं, क्योंकि मैंने इसके बारे में विभिन्न बातें सुनी हैं. यदि मैं आपसे कुछ कहूंगा तो लोगों को उस पर विश्वास करना होगा, क्योंकि मैं वहां था, सबकी बात सुन रहा था और इसमें शामिल था, बहुत स्पष्ट राजनीतिक इच्छाशक्ति थी, हमें बहुत स्पष्ट निर्देश दिए गए थे और हम पर किसी प्रकार का प्रतिबंध नहीं लगाया गया था.’
हमारे ऊपर कोई प्रतिबंध नहीं
उन्होंने कहा कि लोग पूछ रहे हैं कि क्या कोई प्रतिबंध थे या हमें विवश करके रखा गया था. उन्होंने कहा, ‘अगर कोई प्रतिबंध थे तो वे स्वनिर्मित थे. हमने तय किया कि लड़ाई के नियम क्या होंगे. हम किस हद तक जाना चाहते हैं और हम कैसे हालात को काबू में रखना चाहते हैं.’
सिंह ने कहा, ‘इसलिए मैं यह स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हम पर कोई प्रतिबंध नहीं था, दोहराता हूं कि कोई भी पाबंदी नहीं थी. हमें योजना बनाने और उसे लागू करने की पूरी आजादी दी गई थी. मैं कहना चाहता हूं कि हमारे हमले सटीक और सोच-समझकर किए गए थे, क्योंकि हम इस मामले में परिपक्वता दिखाना चाहते थे.’
भारतीय सेना पाकिस्तान पर भारी
सिंह की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी सहित विपक्षी नेताओं ने प्रधानमंत्री और सरकार पर इस बात के लिए हमला बोला है कि जब हमारी सेना पाकिस्तान पर भारी पड़ रही थी, तब उन्होंने संघर्ष विराम पर सहमति जताई. भारतीय वायुसेना प्रमुख ने ‘युद्ध को समाप्त करने’ के महत्व पर भी जोर दिया.
पाकिस्तान के सरगोधा के बारे में वायुसेना प्रमुख ने कहा, ‘हम अपनी वायुसेना में ऐसे ही दिनों का सपना देखते हुए बड़े हुए हैं. किसी दिन हमें मौका मिलेगा. संयोग से मुझे अपनी सेवानिवृत्ति से पहले यह मौका मिल गया. हमने उस हवाई क्षेत्र पर हमला किया, जहां हमें एफ-16 विमानों के बारे में बहुत पुख्ता जानकारी मिली थी.’
सीडीएस का मिला साथ, एजेंसियों ने भी की मदद
सिंह ने यह भी कहा कि प्रमुख रक्षा अध्यक्ष (सीडीएस) का पद सैन्य अभियानों में एक महत्वपूर्ण बदलाव लेकर आया है. उन्होंने कहा, ‘सीडीएस हमेशा हमारे बीच एकता बनाए रखने और समस्याओं को सुलझाने के लिए मौजूद रहते थे. जब भी हमें जरूरत होती थी, हम वरिष्ठ नेतृत्व के पास जाकर मुद्दों पर चर्चा किया करते थे.’
एयर चीफ मार्शल ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की भूमिका पर प्रकाश डाला, जिससे अन्य एजेंसियों और सुरक्षा बलों को एक साथ लाने में मदद मिली. उन्होंने बताया कि जब अभियान शुरू हुआ तो सैन्य प्रमुखों ने इसके संभावित परिणामों और भारत को कैसे प्रतिक्रिया देनी चाहिए, इस पर विस्तार से चर्चा की.
हवाई युद्ध किसी भी देश की पहली प्रतिक्रिया
‘ऑपरेशन सिंदूर’ से मिली सीख के बारे में सिंह ने कहा, ‘इस अभियान की सबसे बड़ी सीख यह रही है कि हवाई युद्ध की प्रधानता एक बार फिर सामने आई है. लोगों को यह एहसास हो गया है कि हवाई युद्ध किसी भी देश की पहली प्रतिक्रिया है और हवाई युद्ध वास्तव में त्वरित प्रतिक्रिया दे सकता है, सटीकता के साथ अंदर तक हमला कर सकता है और बिना अनावश्यक नुकसान के अपने उद्देश्य को प्राप्त कर सकता है.’
ये भी पढ़ें:- ‘अगर ECI पर भरोसा नहीं तो दें इस्तीफा’, राहुल गांधी के ‘वोट चोरी’ बयान पर भाजपा का पलटवार
Source link
Air Force,OPERATION SINDOOR,AP Singh,Pakistan,Air force,AP Singh,operation sindoor news,Air Chief Marshal AP Singh,hindi news,Amarpreet Singh news,एयर चीफ मार्शल अमरप्रीत सिंह,अमरप्रीत सिंह,ऑपरेशन सिंदूर,पाकिस्तान,हिंदी न्यूज