पीएम मोदी के जापान दौरे में बुलेट ट्रेन परियोजना पर भी होगी चर्चा, प्रोजेक्ट को मिल सकती है नई रफ्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय दौरे पर जापान गए हुए हैं. ऐसे में जाहिर है कि पीएम मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर भी चर्चा होना लाजमी हो जाता है, क्योंकि जापान ही वो देश है, जो भारत को उसकी पहली बुलेट ट्रेन देगा.
प्रधानमंत्री मोदी अपने जापानी दौर के दौरान जापान के सेंडाई के तोहोकु शिंकानसेन प्लांट भी जाएंगे, जहां पर जापानी बुलेट ट्रेन का प्रोडक्शन प्लांट है. साल 2015 में तय हुए करार के तहत जापान से भारत को पहली बुलेट ट्रेन मिलने में देरी हो रही है. इसलिए मुमकिन है कि पीएम मोदी और जापानी पीएम शिगेरु इशिबा के बीच बुलेट ट्रेन परियोजना पर भी बात होगी.
भारत-जापान बुलेट ट्रेन के करार में अपग्रेड
कुछ दिन पहले एबीपी न्यूज की ओर से जानकारी दी गई थी कि भारत-जापान के बीच बुलेट ट्रेन के करार में अपग्रेड करते हुए ये तय हुआ है कि जापान, भारत को E10 शिंकासेन बुलेट ट्रेन देगा, जो नेक्स्ट जनरेशन टेक्नोलॉजी से लैस है. इससे पहले भारत ने जापान से E5 सीरीज की शिंकासेन बुलेट ट्रेनों को खरीदने का प्लान बनाया था, लेकिन अब इसे अपग्रेड कर दिया गया है.
E10 शिंकासेन बुलेट ट्रेन की अधिकतम स्पीड 320 किमी/घंटा है तो वही इस ट्रेन को भूकंप रोधी तकनीक से लैस किया गया है, यानी इस ट्रेन में भूकंप के दौरान भी रेल पटरी से उतरने से बचाने की तकनीक है.
अंदर बैठे यात्रियों को नहीं लगेगा झटका
इसके अलावा इस ट्रेन की एक खास बात ये भी है कि इतनी हाई स्पीड में ट्रेन के चलते रहने के बावजूद अंदर बैठे यात्रियों को जरा सा भी झटका नहीं लगेगा. इसके अलावा इस बुलेट ट्रेन में जगह भी ज्यादा रहेगी, यानी यात्रियों को अपना सामान रखने के लिए ज्यादा जगह होगी.
मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना को पीएम मोदी के इस दौरे से और अधिक गति मिलने की उम्मीद है. साल 2017 में शुरू इस प्रोजेक्ट का पहला सेक्शन, जो सूरत-बिलीमोरा होगा, साल 2027 में तैयार होने की उम्मीद है. जबकि मुंबई-अहमदाबाद के पूरे रूट के साल 2029 तक बन जाने की उम्मीद है.
2 घंटे 7 मिनट में मुंबई से अहमदाबाद
320 किमी/घंटा की स्पीड से दौड़ते हुए बुलेट ट्रेन मुंबई-अहमदाबाद के बीच की 508 किमी की दूरी को सिर्फ 2 घंटे 7 मिनट में पूरा कर लेगी. आपको बता दें कि बुलेट ट्रेन परियोजना का ज्यादा हिस्सा गुजरात में है, जो 352 किमी कॉरिडोर है, जबकि महाराष्ट्र में इस परियोजना का 156 किमी हिस्सा पड़ता है.
कुछ दिनों पहले नेशनल हाई स्पीड रेल कॉरपोरेशन से बुलेट ट्रेन परियोजना के निर्माण पर कहा गया था कि 508 किमी लंबे इस रूट पर 317 किमी के हिस्से पर वायाडक्ट का काम पूरा कर लिया गया है. इसके अलावा 396 किमी पियर वर्क, 407 किमी पियर फाउंडेशन और 337 किमी गर्डर कास्टिंग का काम पूरा किया जा चुका है.
तेजी से चल रहा कंस्ट्रक्शन का काम
NHSRCL के मुताबिक, गुजरात में वायाडक्ट पर फिलहाल नॉइज बैरियर लगाने का काम तेजी से चल रहा है और लगभग 3 लाख 90 हजार नॉइज बैरियर करीब 195 किमी की दूरी के सेक्शन पर लगाए भी जा चुके हैं.
सबसे पहले शुरू होने वाले सूरत-बिलिमोरा सेक्शन पर स्टेशनों के बीच करीब 1600 ओएचई मास्ट लगाए जा चुके हैं, जो मेनलाइन वायाडक्ट के करीब 40 किलोमीटर दूरी के हिस्से को कवर करते हैं. इसके अलावा गुजरात में ओवरहेड इक्विपमेंट लगाने का काम अभी चल रहा है. साथ ही गुजरात में 198 ट्रैक किलोमीटर ट्रैक बेड के कंस्ट्रक्शन का काम भी पूरा हो चुका है.
बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में कुल 12 स्टेशन
इस बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट में कुल 12 स्टेशन स्थापित किए गए हैं. इसमें गुजरात में 8 स्टेशन हैं, जबकि महाराष्ट्र में 4 स्टेशन बनाए गए हैं. गुजरात में जहां साबरमती, अहमदाबाद, आणंद, वडोदरा, भरूच, सूरत, बिलीमोरा, वापी स्टेशन हैं तो वहीं महाराष्ट्र में बोइसर, विरार, ठाणे और बांद्रा स्टेशन हैं. इसके अलावा महाराष्ट्र की बात करें तो बीकेसी और शिलफाटा के बीच तकरीबन 21 किलोमीटर लंबी सुरंग का काम भी फिलहाल निर्माणाधीन है.
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