निठारी हत्याकांड के सभी मामलों में कोली और पंढेर बरी, एक मामले में पहले मिली सजा के चलते फिलहाल जेल में रहेगा कोली
2006 के निठारी हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश आया है. सुप्रीम कोर्ट ने 12 मामलों में सुरेंद्र कोली और 2 मामलों में मोनिंदर सिंह पंढेर को बरी करने के हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है. कोली को एक मामले में पहले सुप्रीम कोर्ट से उम्र कैद की सजा मिली थी. इसके चलते वह अभी भी जेल में है, लेकिन पंढेर पर सभी मामले खत्म हो गए हैं.
29 दिसंबर 2006 को नोएडा के निठारी में पंढेर के घर के पीछे के नाले से 8 बच्चों के कंकाल मिले थे. बाद में घर के आसपास के नालों की तलाशी और खुदाई में कई और कंकाल मिले. मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली के खिलाफ कुल 19 केस दर्ज हुए. पंढेर को 2 मामलों को छोड़कर बाकी में राहत मिल गई थी, लेकिन कोली को निचली अदालत ने कुल 13 मामलों में फांसी की सजा दी.
रिम्पा हलदर हत्या केस में मिली मौत की सजा
कोली को रिम्पा हलदर हत्या केस में मिली मौत की सजा की सुप्रीम कोर्ट ने भी पुष्टि की थी. हालांकि, 2015 में दया याचिका के निपटारे में हुई देरी के आधार पर इसे उम्र कैद में बदल दिया गया था. इसके चलते वह अभी जेल में है. बाकी 12 मामलों में 16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाई कोर्ट का फैसला आया. हाई कोर्ट ने सब में उसे बरी कर दिया. पंढेर को भी उसके खिलाफ चल रहे दोनों मामलों में बरी किया गया.
कोली ने हाई कोर्ट में दावा किया था कि उसे हिरासत में रखकर जबरदस्ती अपराध कबूल करवाया गया था. हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि सीबीआई की जांच कोली के इकबालिया बयान और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है. सिर्फ इनके आधार पर दोष सिद्ध नहीं किया जा सकता. मामले में कोई प्रत्यक्षदर्शी गवाह नहीं है. घर के आसपास कंकाल जरूर मिले थे, लेकिन इसमें दोनों आरोपियों की भूमिका साबित करने के पर्याप्त सबूत नहीं हैं.
पीड़ित परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती
हाई कोर्ट ने यह भी कहा था कि इतनी बड़ी संख्या में कंकाल मिलना मानव अंगों की तस्करी से जुड़ा मामला भी हो सकता है. उसमें कोई बड़ा गिरोह शामिल रहा होगा, लेकिन सीबीआई ने पहले ही मान लिया कि पंढेर और कोली दोषी हैं और उसी दिशा में जांच की.
इस फैसले को सीबीआई और पीड़ित परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. बुधवार (30 जुलाई, 2025) को चीफ जस्टिस बी आर गवई, जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा और के विनोद चंद्रन की बेंच ने कहा कि उन्हें हाई कोर्ट के फैसले में कोई कमी नहीं दिखाई दे रही है.
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