भारत-जापान रक्षा साझेदारी 2025: चीन पर सख्त रुख, ऐतिहासिक घोषणापत्र में सुरक्षा को लेकर साफ संदेश
India Japan Defence Partnership: भारत और जापान ने शुक्रवार को एक ऐतिहासिक रक्षा घोषणापत्र जारी किया, जिसने पूरे एशिया का ध्यान खींचा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा के बीच वार्षिक शिखर सम्मेलन के बाद यह समझौता सामने आया। घोषणापत्र में हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्वतंत्रता और स्थिरता बनाए रखने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। चीन की आक्रामक नीतियों के बीच इसे भारत-जापान रक्षा साझेदारी 2025 का सबसे बड़ा कदम माना जा रहा है। विशेषज्ञ इसे दोनों देशों के बीच रिश्तों को नई ऊंचाई पर ले जाने वाली ऐतिहासिक घटना बता रहे हैं।
सुरक्षा सहयोग के लिए विस्तृत एजेंडा
घोषणापत्र केवल औपचारिक दस्तावेज नहीं, बल्कि ठोस कदमों का विस्तृत एजेंडा भी है। भारत और जापान ने तय किया है कि तीनों सेनाओं के बीच सहयोग को और गहरा किया जाएगा। तकनीकी क्षमताओं के आदान-प्रदान, संसाधनों के साझा उपयोग और संयुक्त सैन्य अभ्यासों की योजना इसमें शामिल है। दोनों देशों ने मानवीय सहायता और आपदा प्रबंधन में भी साथ काम करने का संकल्प लिया है। साथ ही, आतंकवाद विरोधी कदम, साइबर सुरक्षा और नई युद्ध रणनीतियों पर सहयोग को भी अहम जगह दी गई है। यह साफ है कि साझेदारी केवल कागज तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जमीनी स्तर पर असर डालेगी।

चीन की गतिविधियों पर गंभीर चिंता
भारत-जापान घोषणापत्र का सबसे अहम हिस्सा चीन की बढ़ती आक्रामकता पर चिंता है। दक्षिण चीन सागर और पूर्वी चीन सागर के हालात का जिक्र करते हुए दोनों देशों ने साफ कहा कि सुरक्षा से समझौता संभव नहीं। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय विवादों का हल अंतरराष्ट्रीय कानूनों और संयुक्त राष्ट्र के सिद्धांतों के तहत होना चाहिए। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह बयान चीन को सीधा संदेश है कि भारत और जापान सुरक्षा के मामले में एकजुट हैं। घोषणापत्र ने इस बात को भी रेखांकित किया कि एशिया में शांति बनाए रखने के लिए शक्तियों का संतुलन जरूरी है।

संयुक्त रणनीतियां और रक्षा उत्पादन में सहयोग
घोषणापत्र में कई व्यावहारिक कदम भी बताए गए हैं। भारत और जापान ने तय किया कि वे रासायनिक, जैविक और रेडियोलॉजिकल खतरों से निपटने के लिए संयुक्त रणनीतियां तैयार करेंगे। इसके अलावा, दोनों देशों ने रक्षा उपकरणों और तकनीकी के सह-विकास और सह-उत्पादन पर जोर दिया। इसमें निजी कंपनियों की सक्रिय भागीदारी को भी बढ़ावा दिया जाएगा। नौसेना और तटरक्षक बल के सहयोग को प्राथमिकता दी जाएगी ताकि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक मार्ग सुरक्षित रहें। इस पहल से न केवल दोनों देशों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि यह क्षेत्रीय स्थिरता की गारंटी भी बनेगी।

वैश्विक शांति और क्वाड की अहम भूमिका
घोषणापत्र ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत-जापान साझेदारी केवल एशिया तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और समृद्धि में भी योगदान देगी। दोनों प्रधानमंत्रियों ने क्वाड जैसे बहुपक्षीय ढांचों की अहमियत को रेखांकित किया और इसके तहत सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। विशेषज्ञ मानते हैं कि भारत-जापान रक्षा सहयोग एशिया में शक्ति संतुलन बनाने और चीन की आक्रामक नीतियों को संतुलित करने में बड़ी भूमिका निभाएगा। “यह साझेदारी वैश्विक शांति और स्थिरता के लिए एक मील का पत्थर है,” दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त बयान में कहा। यह साफ है कि आने वाले वर्षों में भारत और जापान की रक्षा साझेदारी अंतरराष्ट्रीय राजनीति का अहम हिस्सा होगी।

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