ऑपरेशन सिंदूर: पहलगाम हमले पर राजनाथ सिंह का बयान, धर्म नहीं, कर्म के आधार पर हुई कार्रवाई
Rajnath Singh: 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को हिला दिया। निर्दोष पर्यटकों की हत्या के बाद भारत ने जिस तरह से ऑपरेशन सिंदूर चलाया, उसकी चर्चा लगातार हो रही है। इस अभियान में सुरक्षा बलों ने सभी हमलावरों को ढूंढकर खत्म किया। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस ऑपरेशन पर बोलते हुए साफ किया कि किसी का धर्म नहीं पूछा गया, बल्कि उनके कर्म के आधार पर कार्रवाई की गई। उनका कहना था कि आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता और उसका जवाब सिर्फ सख्त कदमों से दिया जाना चाहिए।

रामायण का उदाहरण और नीति का संदेश
राजनाथ सिंह ने अपने भाषण में रामायण का उदाहरण देकर ऑपरेशन की सोच को स्पष्ट किया। उन्होंने बताया कि जब रावण ने सीता जी का हरण किया, तब हनुमान जी लंका पहुंचे। वहां रावण के सैनिकों से भिड़ने के बाद जब सीता जी ने पूछा कि इतना उत्पात क्यों मचाया, तो हनुमान जी ने कहा—”जिन मोहि मारा, तिन माई मारे”। रक्षा मंत्री ने कहा कि पहलगाम हमले में भी यही नीति अपनाई गई। जिन्होंने देश के नागरिकों को मारा, जवाब उन्हीं को दिया गया। यह संदेश आतंकियों और उनके समर्थकों दोनों के लिए है।

धर्म नहीं, कर्म का हिसाब
रक्षा मंत्री ने स्पष्ट कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी का धर्म पूछना हमारे एजेंडे में नहीं था। कार्रवाई का आधार सिर्फ यह था कि किसने मासूमों की जान ली और देश की शांति को बिगाड़ा। उन्होंने कहा कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन अगर कोई हमारे नागरिकों पर हमला करता है, तो हम उसे बख्शते नहीं हैं। इस बयान ने साफ कर दिया कि भविष्य में भी भारत का रुख आतंकवाद के खिलाफ ऐसा ही रहेगा।

एमपी दौरे में आत्मनिर्भर भारत पर जोर
राजनाथ सिंह मध्य प्रदेश के रायसेन में बीईएमएल रेल हब के भूमि पूजन समारोह में पहुंचे थे। बीईएमएल की नई परियोजना पर बोलते हुए उन्होंने बताया कि यह न सिर्फ रोजगार के अवसर पैदा करेगी, बल्कि स्थानीय उद्योगों को भी मजबूती देगी। यहां प्रशिक्षण और तकनीकी विकास से क्षेत्र के युवाओं को नए अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र आज न केवल देश की सुरक्षा का आधार है, बल्कि आर्थिक विकास में भी अहम भूमिका निभा रहा है। यहां उन्होंने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए बताया कि 2014 से पहले हम ज्यादातर हथियार विदेशों से खरीदते थे। लेकिन अब भारत अपने हथियार खुद बना रहा है। रक्षा निर्यात 24,000 करोड़ रुपये सालाना तक पहुंच चुका है। यह न केवल देश की सुरक्षा को मजबूत करता है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा करता है।

प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता की तारीफ
अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भारत ने रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य तय किया और उसे हासिल करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। अब छोटे-बड़े उद्योग भी रक्षा क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं, जिससे लाखों युवाओं को रोजगार और प्रशिक्षण के अवसर मिल रहे हैं। बीईएमएल जैसी परियोजनाएं स्थानीय विकास और तकनीकी उन्नति में अहम भूमिका निभा रही हैं।

ऑपरेशन सिंदूर से मिला वैश्विक संदेश
राजनाथ सिंह ने कहा कि पहलगाम हमले के बाद की कार्रवाई सिर्फ बदला नहीं, बल्कि एक वैश्विक संदेश था। भारत किसी को छेड़ता नहीं, लेकिन अगर कोई हमें उकसाता है, तो हम उसे छोड़ते भी नहीं। पहलगाम हमले के बाद की प्रतिक्रिया ने दुनिया को यह दिखा दिया कि भारत शांति का पक्षधर है, लेकिन अपनी रक्षा के मामले में समझौता नहीं करेगा। राजनाथ सिंह के मुताबिक, आतंकवाद का कोई धर्म नहीं होता, उसका सिर्फ एक चेहरा होता है—हिंसा और विनाश। ऐसे तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि आने वाले समय में कोई भारत की सुरक्षा से खिलवाड़ करने की हिम्मत न करे।

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