‘ब्रह्मोस परीक्षण से लेकर काकोरी कांड तक’.. लखनऊ में राजनाथ सिंह ने क्यों छेड़ी इतिहास की यादें?

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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने रविवार (13 जुलाई, 2025) को लखनऊ में एक कार्यक्रम में कहा कि लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस की नवनिर्मित एकीकरण और परीक्षण सुविधा रक्षा क्षेत्र में देश की आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी.

लखनऊ के नेशनल पीजी कॉलेज में रक्षा मंत्री ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त की प्रतिमा का अनावरण किया और एक डाक टिकट जारी किया. इस मौके पर सिंह ने कहा, ‘कुछ दिन पहले ही, मैंने लखनऊ में ब्रह्मोस एयरोस्पेस की एकीकरण और परीक्षण सुविधा का उद्घाटन किया. यह सुविधा रक्षा क्षेत्र में हमारे देश की आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगी और इससे रोजगार भी पैदा होगा.’

रक्षामंत्री ने पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त की प्रशंसा की

उन्होंने उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था की स्थिति की सराहना की, जिसके कारण राज्य में निवेश बढ़ रहा है और उद्योग फल-फूल रहे हैं. रक्षा मंत्री ने कहा, ‘बुनियादी ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव हो रहे हैं. एक्सप्रेस वे, हवाई अड्डा, मेट्रो, मेडिकल कॉलेज… ये सभी विकास की नई तस्वीर पेश कर रहे हैं.’

लखनऊ से लोकसभा सदस्य सिंह ने उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त की भी प्रशंसा की. गुप्त चार बार उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे. सिंह ने कहा, ‘चंद्रभानु गुप्त जी ने स्वतंत्रता आंदोलन में एक साधारण कार्यकर्ता के रूप में शुरुआत की और अपने त्याग, प्रतिबद्धता और नेतृत्व से लाखों लोगों के दिलों में जगह बनाई.’

त्याग और जनता के हितों की रक्षा करना ही कर्तव्य

उन्होंने कहा, ‘चंद्रभानु गुप्त का जीवन हमें बताता है कि सत्ता का मतलब केवल पद या अधिकार नहीं है, बल्कि जिम्मेदारी, त्याग और जनता के हितों की रक्षा करना है. उनका जीवन हमें यह संदेश भी देता है कि राजनीति में मतभेद हो सकते हैं, लेकिन दुश्मनी नहीं होनी चाहिए.’

सिंह ने यह भी कहा कि गुप्त एक नेता से ज़्यादा जनसेवक थे. उन्होंने कहा, ‘जब हम उत्तर प्रदेश के गौरवशाली अतीत की चर्चा करते हैं तो स्वाभाविक रूप से चंद्रभानु गुप्त जी का नाम सामने आता है.’

सरकार के खर्च को किया था कम

सिंह ने गुप्त के संघर्षों की चर्चा करते हुए कहा कि देश के आजाद होने के बाद जब संविधान लागू हुआ और आधुनिक लोकतंत्र की नींव पड़ी, तब देश कई बड़ी-बड़ी समस्याओं से जूझ रहा था और उस समय शासन-प्रशासन की चुनौतियां और जिम्मेदारियां भी बहुत बड़ी थी.

सिंह ने कहा कि गुप्त जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे तो पहले ही दिन उन्होंने मंत्रियों के वेतन और भत्ते को कम करने का कार्य किया, ताकि सरकार के खर्च को कम किया जा सके. आज देश और प्रदेश में जो प्रशासनिक व्यवस्था काम कर रही है, उसकी नींव रखने में चंद्रभानु गुप्त जी जैसे लोगों का बहुत बड़ा योगदान है.

‘कामराज योजना’ के कारण दिया था इस्तीफा

उन्होंने कहा, ‘चंद्रभानु जी ज़्यादा समय तक सत्ता में नहीं रहे, लेकिन जितने भी कम समय सत्ता में रहे, उन्होंने जनकल्याण के कामों को प्राथमिकता दी. वह हमेशा अपनी ईमानदारी के लिए जाने जाते थे. गुप्त ‘कामराज योजना’ से सहमत नहीं थे, इसी के चलते उन्होंने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. आप कल्पना कर सकते हैं कि कैसे एक निर्वाचित नेता को कुछ लोगों की नापसंदगी के कारण पद छोड़ना पड़ा होगा.’

साल 1963 में (मद्रास के पूर्व मुख्यमंत्री) के. कामराज ने जवाहरलाल नेहरू को सुझाव दिया था कि वरिष्ठ कांग्रेस नेताओं को संगठनात्मक कार्य करने के लिए मंत्री पद छोड़ देना चाहिए. इस सुझाव को ‘कामराज योजना’ के नाम से जाना गया. इस योजना के तहत छह मुख्यमंत्रियों और छह केंद्रीय मंत्रियों ने इस्तीफा दे दिया. बाद में 09 अक्टूबर, 1963 को कामराज भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए.

‘काकोरी कांड’ को लेकर राजनाथ सिंह ने कही ये बात

रक्षा मंत्री ने इस मौके पर लखनऊ के “काकोरी रेल एक्शन” को याद करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कहा, ‘हमारा प्रयास इस शहर के साथ-साथ अन्य स्थानों पर भी काकोरी कांड के शताब्दी वर्ष को भव्य तरीके से मनाने का होगा. अगस्त 1925 में आजादी की लड़ाई लड़ रहे क्रांतिकारियों ने भारत की आज़ादी के लिए काकोरी रेलवे स्टेशन के पास ब्रिटिश खजाने को लूट लिया.’

सिंह ने कहा, ‘काकोरी कांड में राम प्रसाद बिस्मिल, अशफ़ाक़ उल्लाह खान और सचिन नाथ बख्शी जैसे क्रांतिकारी भी शामिल थे. काकोरी कांड में कई लोगों को गिरफ्तार किया गया था और ब्रिटिश सरकार ने उन सभी के खिलाफ मुकदमा दायर किया था.’

बड़े-बड़े नेताओं ने की काकोरी कांड की पैरवी

उन्होंने यह भी बताया कि उस समय मदन मोहन मालवीय, लाला लाजपत राय जैसे कई बड़े नेता इन क्रांतिकारियों के समर्थन में खड़े थे और जब काकोरी कांड की सुनवाई शुरू हुई तो चंद्रभानु गुप्त ने प्रख्यात अधिवक्ता गोविंद बल्लभ पंत के साथ क्रांतिकारियों की ओर से अदालत में खड़े होकर उनकी पैरवी की.

सिंह ने कहा कि गुप्त ने अपनी कानून की पढ़ाई का सदुपयोग देश के क्रांतिकारियों के हित में करके यह साबित कर दिया कि वह एक सच्चे देशभक्त थे और यह संयोग ही है कि इस वर्ष काकोरी कांड की 100वीं वर्षगांठ भी मनाई जा रही है.

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